या फिर डरते हो

तुम ये छोटी सी हार होते ही लड़ना क्यों बंद कर देते हो ये दो कदम पीछे जाने पर आगे बढ़ना क्यों बंद कर देते हो, तुम यूं अपनी परछाई को ख़ुद पर हावी क्यों होने देते हो या फिर डरते हो – के कहीं ये  साथ ना छोड़ दे, रोशनी मिल जाने पर?  तुम ये […]

इस बार कुछ यूँ आना

इस बार कुछ यूँ आना के ढलती शाम देख कर जाने की ज़िद ना करनी पड़े, बस एक इंतजार हो अगली सुबह की चाय की चुस्की का इस बार कुछ यूँ आना के घड़ी में गुजरते वक़्त को देख कर दिल घबराए नहीं, बल्कि एक एहसास हो  इन ओझल होते पलों के साथ सब गलतफहमियों के धुआं […]